भारतीय सेना रिटायरमेंट के बाद वफादार कुत्तों को इसलिए मार देती है गोली.

भारतीय सेना रिटायरमेंट के बाद वफादार कुत्तों को इसलिए मार देती है गोली. वफादारी की अगर बात करे तो हम सभी जानते हैं की हर कोई कुत्तो का ही नाम लेगा क्यूंकि बेजुबान होने बावजूद भी कुत्ता अपने मालिक का साथ नहीं छोड़ता हैं |पर अगर वो ही वफादार अगर आप की मुसीबत का कारण बन जाए तो उस दौरान आप क्या करेंगे |जी हाँ आज हम बात कर रहे हैं भारतीय सेना की |आप को बता दे की भारतीय सेना में जिस कुत्ते का भी रिटायरमेंट होता हैं तब उसे सेना के ही लोग गोली मार कर हत्या कर देते हैं | आप घबराइए मत ऐसा करने के पीछे भी बहुत बड़ा राज छुपा हैं |तो आज हम आप को बताएंगे भारतीय सेना का ऐसे करने का कारण

आखिर क्यों मारते हैं रिटायर कुत्तो को

कुत्तों को रिटायरमेंट के बाद मारे जाने के बारे में एक व्यक्ति ने आरटीआई के माध्यम से उत्तर माँग किया, तब पता चला कि उसके पीछे सिक्योरिटी रीजन्स है। आर्मि का मानना ​​है कि रिटायरमेंट के बाद कुत्ता कुछ ऐसे ऐसे व्यक्ति को मिल जाए जिससे देश को हानि हो। वास्तव में कुत्ते को सेना के हर गुप्त स्थान के बारे में पता होगा पाकिस्तान के साथ, भारत समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई पर एक युद्ध केंद्र रखता है। यह देश में सबसे ठंडा स्थान माना जाता है क्योंकि तापमान -50 डिग्री तक कम होता है। यह भी सबसे बड़ा सैन्य शिविर है; 1 9 84 में पाकिस्तान के खिलाफ इस क्षेत्र में कई लड़ाई लड़ी गई थी। 2010 तक भारत में 1.4 मिलियन सक्रिय और 2.1 मिलियन रिजर्व सेना कर्मियों की संख्या थी, जिससे यह दुनिया में सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना बन गई। हमारे संशोधन में सैन्य भर्ती है लेकिन इसे कभी भी लागू नहीं किया गया है भारतीय सेना द्वारा हाई आल्टीटयूट वारफेयर स्कूल की स्थापना की गई थी (एचएडब्ल्यूएस) इसके बाद से प्रशिक्षण के लिए सेना, अमरीका, रूस आदि जैसे कई देशों की सेनाओं का दौरा किया गया है। भारत ने अपने परमाणु हथियार परीक्षणों को ऐसे प्रतिष्ठित तरीके से अंजाम दिया कि सीआईए इसके बारे में अनजान था। यह उनकी सबसे बड़ी जासूसी विफलताओं में से एक के रूप में दर्ज किया गया है।

एक ये कारण भी हैं

इन सभी के अलावा आर्मी ने यह बात भी बताई कि अगर कुत्ते बीमार भी हैं तो उस दौरान उनकी अचे तरीके से उपचार भी कराए जाते हैं लेकिन बाद में अगर कोई कुत्ता ठीक नहीं होता तो उसे मार दिया जाता है। भारतीय सेना ही सरकार की एकमात्र शाखा है जो किसी भी जाति आधारित आरक्षण से मुक्त है। उम्मीदवारों को उनकी योग्यता और शारीरिक सहनशक्ति के आधार पर ही भर्ती किया जाता है। लोंगेवाला की लड़ाई हमारे सैन्य कौशल का सबसे मजबूत प्रदर्शन के रूप में जाना जाता है। यह 1 9 71 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया था, जिसमें 120 भारतीय सैनिकों ने 2000 पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ जमीन खड़ी कर दी थी। इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद, भारतीय सेना को केवल दो हताहतों की संख्या का सामना करना पड़ा। एक बड़ी बाढ़ 2013 में उत्तराखंड को नष्ट कर दिया। भारतीय सेना ने तब दुनिया में सबसे बड़ी नागरिक बचाव अभियान चलाया।

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